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SAIKAL KEE SAAVAREE ICSE CLASS VI

ICSE BOARD

 

साइकिल की सवारी

सुदर्शन

Very short type question answer:

  1. लेखक के दिल में क्या ख्याल आया?

उ०– लेखक के दिल में साइकिल सिखने का ख्याल आया।

  1. किस विद्या से समय कटता है और समय बचता है?

उ०– हारमोनियम बजाने से समय कटता है और साइकिल की सवारी से समय बचता हैं।

  1. जमाने भर में कौन फिसड्डी रह गया?

उ०– लेखक जमाने भर में फिसड्डी रह गया।

  1. लेखक ने फटे-पुराने कपड़े की तलाश क्यों किए?

उ०- साइकिल चलाना सीखने के लिए लेखक ने फटे पुराने कपड़े की तलाश किए।

  1. लेखक की ओर बेबसी की आँखों से कौन देखा?

उ०- तिवारी जी ने लेखक की ओर बेबसी की आँखों से देखा।

  1. साइकिल सीखने की लेखक की फीस कितने रुपये तय हुई?

उ०- बीस रुपये।

  1. साइकिल सीखना कहा तय हुआ?

उ०- लारेंस बाग के मैदान में साइकिल सीखना तय हुआ।

  1. पहले दिन लेखक को देख कर लोग क्यों हँस रहे थे?

उ०- क्योंकि जल्दी और घबराहट में लेखक पजामा और अचकन दोनों उलटे पहन लिए थे।

 Short type question answer:

1.लेखक ने अपनी पत्नी को साइकिल सीखने का क्या कारण बताया?

उ०- लेखक ने अपनी पत्नी को बताया कि रोज-रोज तांगे का खर्च उसे मार डालता है। इसलिए लेखक साइकिल चलाना सीखेगा।

2.लेखक को स्वंय से लज्जा और घृणा क्यों हुई?

उ०-    लेखक के लड़के ने चुपचाप साईकल चलाना सीख लिया और लेखक के सामने से सवार होकर निकलने लगा इसलिए लेखक को स्वयं से लज्जा और घृणा हुई क्योंकि लेखक अभी तक साइकिल चलाना नही सीखा था।

3.लेखक को अपने ऊपर दया क्यों आती हैं?

उ०-   लेखक न तो साइकिल चलाना जानता है न हि हारमोनियम बजाना इसलिए उसे अपने ऊपर दया आती हैं।

4.लेखक किस पर इल्जाम लगाना चाहता था?

उ०-   लेखक तिवारी जी पर इल्जाम लगाना चाहता था।

5.साइकिल चलाते समय यदि रास्ते में कोई आ जाता तो लेखक की क्या दशा होती थी?

उ०-  लेखक दुर से ही गला फाड़-फाड़कर चिल्लाना शुरु कर देते ‘साहब’ जरा बाई तरफ हट जाइए दूर गाड़ी दिखाई देती तो लेखक के प्राण सूख जाते।

  1. लेखक के मन में साइकिल सीखने का ख्याल क्यों आया?

उ०- अपने बेटे को साइकिल चलाता देखा तो लेखक के मन में भी साइकिल सीखने का ख्याल आया।

  1. लेखक की पत्नी की उनके साइकिल सीखने की बात पर क्या प्रतिक्रिया थी?

उ०-  लेखक की पत्नी यह जानती थी कि लेखक के लिए साइकिल सीखना मुश्किल काम है। वो आशा नहीं करती कि लेखक सिख पायेगा।

  1. “अब रात को चैन की नींद कहा?” तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।

उ०-  प्रस्तुत पंक्ति में यह बताया गया है कि लेखक को अगले दिन साइकिल सीखने की इतनी उत्सुकता रहती है लेखक को रात में नींद भी नहीं आती कि कब सुबह हो और साइकिल सीखने जाए।

  1. साइकिल चलाना सीखने के लिए लेखक ने क्या-क्या तैयारियां की?

उ०-  साइकिल सीखने के लिए लेखक ने पुराने कपड़े तलाश किए, दो डिब्बे जम्बक खरीदे ,पड़ोस के मिस्त्री से साइकिल मांगी।

  1. अपने लड़के को साइकिल चलाता देखकर लेखक के ह्रदय में कैसे   ख्याल आए?

उ०- अपने लड़के को साइकिल चलाता देखकर लेखक को अपने आप से लज्जा और घृणा जैसे ख्याल आए की सारे जगारे भर में लेखक ही फिसड्डी (नालायक़) रह गया हैं।

  1. लेखक ने तिवारी जी को कौन-सी समस्या बताई और तिवारी जी ने उसका क्या हल निकाला?

उ०-  लेखक ने तिवारी जी को साइकिल सीखने के लिए ऐसे आदमी कि तलाश थी जो उन्हें साइकिल सिखा सके यही समस्या बताई और तिवारी जी ने हल निकाला की आदमी तो है मगर फीस लेकर सिखाएगा।

  1. साइकिल सिखाने का स्कूल खोलने का निश्चय लेखक को किस अनोकृष्ट का परिचायक हैं?

उ०-  साइकिल सीखने का स्कूल खोलने का निश्चय ऐ लेखक के हमेशा अपने लाभ की ओर विशेष ध्यान देता है।

13.गिर जाने के बाद लेखक के सामने गंभीर प्रश्न क्या था ?

उ०- लेखक के सामने गिर गाने के बाद गंभीर प्रश्न यह था की गिरने का सारा इलज़ाम किस पर लगाया जाए।

  1. गिरने का सारा इलज़ाम किस पर लगाना चाहा?

उ०- गिरने का सारा इलज़ाम लेखक तिवारीजी पर लगाना चाहा।

Long question answer:

  1. साइकिल सीखने के पहले दिन किस तरह व्यर्थ हो गए?

उ०- पहले दिन यहाँ से साइकिल लेकर निकले ही थे कि बिल्ली रास्ता काट दी और एक लड़के ने छिक दिया फिर भगवान का नाम लेकर आगे बढ़े तो बाजार में सभी लेखक की तरफ देखकर हस रहे थे तभी लेखक आपने को देखा कि वह घबराहट में पजामा और अचकन उलटे पहन लिए हैं।तभी लेखक ने उस्ताद से माफी मांगी और घर लौट गए ।

  1. साइकिल सीखने के दूसरे दिन कैसे व्यर्थ हो गए?

उ०-  दूसरे दिन उस्ताद लेखक को साइकिल पकड़ा कर लस्सी पीने चले गए तभी लेखक के जी में आया वे साइकिल का हेंडल पकड़कर चलने लगे अभी दो ही कदम चले कि साइकिल लेखक के पॉव पर गिर गई इसप्रकार लेखक और साइकिल दोनों ही दूसरे दिन जख्मी हो गए। लेखक लँगडते हुए घर लौट आया।

  1. लेखक के साइकिल सीखने के साहस और धीरज ह्रदय का कैसे पता चलता है?

उ०-  लेखक साइकिल सीखने के दौरान कई बार गिरे,कई बार शहीद हुए, घुटने तुड़वाए, कपड़े फड़वाए पर जी नही छोड़ा आखिर साइकिल चलाना सीख गए।इससे लेखक के साइकिल सीखने के साहस और धीरज ह्रदय का पता चलता है।

  1. ‘ मगर बुरा समय आता है तो बुद्धि पहले ही भ्रष्ट हो जाता है ‘, यह कथन किस प्रकार सच है?

उ०- यह कथन इस प्रकार से सच है। की जब बुरा समय या कोई विपत्ति    आती है , तो उस समय सबसे पहले हमारा विवेक ( बुद्धि ) काम नहीं आती अर्थात बुरा समय के आने पर हम निश्चित नहीं कर पाते क्या सच्च है और क्या गलत क्या हमे करना चाहिए क्या नहीं ठीक उसी प्रकार गिरते समय लेखक को ख्याल ही नहीं आया की हैंडल घुमाया भी जा सकता था।

 

निचे लिखी लोकोक्तियों के अर्थ लिए :-

प्र०-      १. सर मुड़ाते ही ओले पड़ना।

२. बैल मेढ़ न चढ़ना।

३. आम के आम गुठलियों के दाम।

४. बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद।

५. आ बैल मुझे मार।

 

उ०-     १.  काम शुरू करते ही मुसीबत आना।

२. काम पूरा होने आसार नज़र न आना।

३. दोहरा लाभ।

४. मुर्ख गुणों का महत्व नहीं समझता।

५. स्वयं मुसीबत मोल लेना।

उचित विकल्प पर का चिन्ह लगाइए :-

 

१.  हमने सोचा ,लाओ सारा इलज़ाम तिवारी जी पर लगा दे और आप साफ़ बच जाएँ। बोले , ” यह सब तिवारी जी की शरारत है। ”  किसने सोचा ?

उस्ताद जी ने            लेखक ने   ✔      लेखक की पत्नी ने          लेखक के बच्चो ने

२. लेखक क्या इलज़ाम तिवारी जी पर लगाना चाहता था ?

डकैती का             चोरी का           साइकिल दुर्घटना का  ✔                 अत्याचार का

३. तिवारी जी का पूरा नाम क्या है ?

तिवारी रामप्रासद      तिवारी प्रेमनिवास      तिवारी श्यामनरायण     तिवारी लक्ष्मीनारायण  ✔

४. लेखक दूसरे दिन जब साईकिल निकले तो उस्ताद साहब _____पिने चले गये ?

लस्सी    ✔      दूध            पानी         सरबत

५. लेखक और साईकिल दोनों जख्मी हो गए।

पहले दिन            दूसरे  दिन ✔              तीसरे दिन          चौथे दिन

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