नीलू

                                                                                               

 

नीलू

महादेवी वर्मा

 

सही उत्तर चुने :-

क. लूसी के लिए सबसे अधिक किसे रोना चाहिए था ?

लेखक को   (   )   उसके बच्चे  को ( ✔  )  भूतिया कुत्ते को (  )  बिल्ली को (   )

ख. रजाई में वह क्या खोजता रहता था ?

अपना प्रिय खादय प्रदार्थ   (   )  दुगथ – चूर्ण (   ) माँ के पेट की उन्नता को ( ✔ )   बिल्ली             को (   )

ग. डलिया में वह कैसा लगता था ?

ऊन की गेंद जैसा (✔ )    झबरीले खरगोश जैसा (  ) रोंएदार स्वेटर जैसा (   )  हिरणी जैसा ( )

घ. नीलू की कथा अपूर्ण है उसकी

लेखिका के बिना (  ) माँ के बिना ( ✔ )    भूटिया कुत्ते के बिना (  )  हिरणी के बिना (  )

ङ.  नीलू पक्षी शावक के सतर्क कर्तव्य संभालता था ?

पहरेदार का  ( ✔  )      माली का (   )  नौकर का  (   )      रही का (   )

 

संक्षिप्त प्र० /  उ०  :–

१. कुत्ते भाषा नहीं जानते तो वे क्या पहचानते है ?

=> कुत्ते भाषा नहीं जानते वे ध्वनि पहचानते है।

२. लूसी की मैत्री किससे हो गई ?

=> लूसी  मैत्री एक भूटिया कुत्ते से हो गई.

३. लूसी ने कितने बच्चे को जन्म दिया ?

=> लूसी के दो बच्चे थे।

४.  शीत काल में कुत्ते लकड़बग्घे के आने की गंध पाने में क्यों असमर्थ रहते है ?

=>   शीत काल में घ्राणशक्ति के कुंठित हो जाने से कुत्ते लकड़बग्घे के आने की गंध पाने में असमर्थ रहते है।

५.  लूसी क्या पिलाया जाता था ?

=> लूसी को दूध – चूर्ण से दूध बनाकर उसे पिलाया जाता था।

६ नीलू की कथा किसकी कथा के बिना अपूर्ण है ?

= नीलू की कथा उसकी माँ की कथा के बिना अपूर्ण है।

७.  रात में नीलू क्या करता था ?

=> रात में कई -कई  बार वह पुरे कंपाउंड का और पशु –  पक्षियों के घर का चक्कर लगता।

८. नीलू का जीवन कितने वर्षो का था ?

=> नीलू का जीवन चौदह वर्षो का था।

संक्षिप्त उत्तर :-

१. जन्म के बाद लूसी के बच्चे क्या हुआ ?

=> जन्म के बाद लूसी एक बच्चा  तो  शीत के कारण मर गया और दूसरा उस ठिठुरने वाले परिवेश से जूझने लगा।

२. नीलू किस लिए रोता  चिल्लाता था ?

=> नीलू दूध के अभाव के कारण शोर मचाता था वह माँ के पेट की उष्णता खोजता न पाने पर रोता चिल्लाता रहता।

३. बारह वर्षो से नीलू के बैठने का स्थान कहा था ?

=> बारह वर्षो से लूसी के बैठने का स्थान लेखिका के घर का बहरी बारांदा रहा उसकी ऊपरी सीढ़ी पर बैठता था।

 

४. किसी परिचित की आने की सूचना नीलू कैसे देता था ?

=> किसी परिचित को आता हुआ देखकर , वह धीरे – धीरे भीतर आकर लेखिका के कमरे के दरवाजे पर खड़ा हो जाता था लेखिका से ‘ मैं आ रही हूँ ’  सुनने पर हि वह बाहर जाकर निश्चित स्थान पर बैठता था।

५.  लूसी की मृत्यु कैसे हुई ?

=> लूसी एक संध्या के झुटपुटे ऐसी में गई की फिर लौट ही न सकी शीतकाल में घ्राणशक्ति के कुछ कष्ती हो जाने के कारण लकड़ से के आने की गंध पाने में असमर्थ रही और उनका आहार बन गई। ६. नीलू का कैसा स्वभाव सबके लिए आश्चर्य का विषय था ?

=> नीलू के स्वभाव में हिंसा प्रकृत्ति का कोई चिन्ह नहीं था उसे कभी कसी पशु – पक्षी पर झपटे मारते नहीं देखा गया।

७.  सबके सो जाने पर नीलू क्या करता था ?

=> सबके सो जाने पर , वह गर्मियों में बाहर लॉन में और सर्दियों में बारंदे में तरुत पर बैठ कर पहरेदारी का कार्य करता।

८. लेखिका को नीलू के बुरा मान जाने की चिंता क्यों थी ?

=> क्योकि नीलू के बुरा मानने पर वह खाना – पीना छोड़ देता अनशन आरंभ कर देता।, इसलिए लेखिका को नीलू का बुरा मान जाने की चिंता थी।

९. नीलू ने ख़रग़ोशों की जान कैसे बचाई ?

=> नीलू पत्तियों की सर सराहट से खरगोशों के संकट को पहचान कर कूदकर दूसरी और पहुँचा बिल्ला तो भाग गया परन्तु खरगोशों को बाहर निकालने से रोकने के लिए वह रातभर ओस से भीगता हुआ सुरंग के दवार पर खड़ा रहा।

१०. बड़े होने पर नीलू कैसा दिखता था ?

=> बड़े होने पर रोमों के भूरे , पिले , और काले रंगो के मिलान से जो रंग बना एक विशेष प्रकार का धुप – छाही हो गया था धूप पड़ने पर एक रंग छॅा ह में दूसरे रंग की और दिये के उजाले में तीसरे रंग की कानो की चौड़ाई और नुकीलेपन में नवीनता थी सिर से बड़ा और चौड़ा था लंबोतरा था पर सुडौल था पूछ रोमों से युक्त ऊपर की ओर मूडी  कुंड लीदार थी पैर लम्बे ,पंजे मुटिये के समान मजबूत ,चौड़े और मुड़े हुए नाखुनो से युक्त थे।

११. नीलू के स्वभाव की क्या विशेषता थी ?

=> आकृति की विशेषता के साथ उसके बल और स्वभाव में भी विशेषता थी। ऊँची दिवार भी , वह एक छलाँग में पार कर लेता था। रात्रि में उसका बार भौकना भी वातवरण की स्तव्धता कंपित कर देता है।

  दीर्घ उत्तररीय :-

१. कौन सी बातें लूसी को राजसी विशेषताएँ प्रदान करती थी ?

=> लूसी की हिरणी के समान वेग वती , साँचे में ढली हुई देह , जिस पर काला आभास देने वाले भूरे- पीले रोम , बुद्धिमानी का पता देने वाली  काली पर छोटे आँखे ,सजग खड़े कान  और सघन रोएँदार तथा पिछले पैरों के टखनों को छूने वाली पूँछ सब कुछ उसे राजसी विशेषता प्रदान करती है।

२. पशु – पक्षियों के साथ हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए ?

=> हमें पशु – पक्षियों से प्रेम करना चाहिए पशु – पक्षियों के साथ प्रेम व् अपनत्व का व्यवहार करना चाहिए जीव – मात्र के प्रति दया की भावना होनी चाहिए।

३. लेखिका के मोटर दुर्घटना में घायल होने पर नीलू की क्या प्रतिक्रिया हुई ?

=> लेखिका के मोटर दुर्घटना में घायल होने की बात पता चलने पर नीलू उदास हो गया वह तीन दिन तक खाना पीना नहीं किया तब उसे लेखिका से मिलवाने अस्पताल ले जया गया।

४. ‘ पर  लूसी को सामान मँगवाने वालों के भुलक्क्ड़पन से भी कभी कोई शिकायत नहीं रही ‘ अर्थ ? स्पष्ट कीजिए

=> प्रस्तुत पंक्ति में यह बताया गया है की किसी -किसी उसे कई बार सामान लाने जाना पड़ता था लेकिन लूसी को उन लोगो से कोई शिकायत नहीं रहती जो एक बार में पूरा सामन माँगना भूल जाता हाला की वर्फीला मार्ग पार करके जाना पड़ता लेकिन वह बार बार दुकान चली जाया करती।

५. ‘ इन दिनों नीलू उसके सतर्क पहरेदार का कर्तव्य सँभाल लेता था। ‘

( i ). यहाँ किन दिनों की बात हो रही है ?

( ii ). नीलू किनका सतर्क पहरेदार बन जाता था और  क्यों ?

=> ( i ).   यहाँ उन दिनों की बात हो रही है जब गौरैया के अंडो से पक्षी शावक निकल जाते और उड़ने के प्रयास में रोशनदानों से नीचे लगते थे।

( ii ).   नीलू पक्षी शावक का सतर्क पहरेदार बन जाता था ता की भय से कोई भी बिल्ली कुत्ता उन नादान पक्षी सवाको को हानी  न पहुँचने पाये।

६. ‘ नीलू का ध्वनि ज्ञान विस्तृत था ‘ उदाहरण देकर समझाइए ?

=> प्रस्तुत पंक्ति में यह बताया जा रहा है की नीलू के ध्वनि सझने का ज्ञान भाषा जानने वाले मनुष्य से बात करने के समान था यदि बहार रस्ते में कोई कह देता ” गुरु जी तुम्हे ढूंढ रही थी , नीलू ” तो वह तेज़ गती से चार दीवारी कूद कर लेखिका के सामने आकर खड़ा हो जाता फिर उनके कोई काम नहीं है जाओ कहने तक वही मूर्तिवत खड़ा रहता।

 

 

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